मेष राशि में एक साथ इक्ट्ठा होंगे सूर्य-राहु और गुरु, देश पर एक नया संकट आने की संभावना, पढ़ें ये ज्योतिषीय विश्लेषण..

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वैदिक ज्योतिष में सूर्य और गुरु ये दोनों बहुत महत्वपूर्ण व प्रभावी ग्रह हैं। सूर्य आत्मा का कारक है और बृहस्पति जीव का कारक है। कोई भी बड़ी घटना इन दोनों ग्रहों के प्रभाव के बिना होती नहीं है। वर्तमान में मेष राशि में राहु चल रहा है। 14 अप्रैल को मेष राशि में सूर्य का गोचर हो जायेगा यहाँ सूर्य उच्च के कहे जाते हैं। इसी बीच 22 अप्रैल गुरु का भी गोचर मेष राशि में हो जाएगा जिससे त्रिग्रही योग बनेगा। 22 अप्रैल से 15 मई तक यह युति बनी रहेगी, और इस सबके साथ 10 मई को मंगल नीच राशि कर्क में होंगे।
मेष में बन रही राहु, गुरु और सूर्य की इस युति पर शनि की नीच की दृष्टि भी होगी, इस ग्रह गोचर से देश पर कई तरह के अशुभ प्रभाव होंगे। संभावना है कि 22 अप्रैल से 15 मई की समयावधि में
देश में कुछ स्थानों पर भीषण अग्निकांड हो सकते हैं।इसके अतिरिक्त सूर्य-राहु की युति से ग्रहण योग और गुरु-राहु की युति से बनेगा गुरु चांडाल दोष । इससे सरकार और जनता के बीच असंतुष्टि की स्थिति बनेगी। जैसे सरकार कोई ऐसे कानून को लागू करवाने की कोशिश करेगी जिससे जनता का गुस्सा बढ़ जाये। इस समय राहु शनि के प्रभाव से जनता भ्रम की स्थिति में आएगी और इस तरह कोई बडा आंदोलन हो सकता है।

एतियाहतन मई के पहले हफ्ते से ही सुरक्षा की दृष्टि से सरकार के उच्च पद पर बैठे लोगों को सावधान रहना चाहिए । मई के माह में ही पड़ोसी देशों की ओर से भी कोई बड़ी साजिश हो सकती है, और युद्ध जैसे हालात हो सकते हैं। देश की आर्थिक स्थिति में भी कुछ अच्छा नहीं दिखता है। सूर्य के ग्रहण योग से पीड़ित होने के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों में भी उपद्रव की संभावना दिखाई दे रही है।

शेयर मार्किट में अचानक तेजी आ सकती है। सोने की कीमत भी बढ़ सकती हैं। और इस समय क्योंकि जीवकारक गुरु पीड़ित होगा तो होने किसी बीमारी के कारण जनता की जान का संकट हो सकता है। 10 मई के बाद ही किसी जंगल में आग लगने की भी घटना घट सकती है। मार्च महीने के अंत आते आते दिल्ली की केंद्र सरकार किसी बड़े आंदोलन के कारण परेशान हो सकती है। इस विश्लेषण के आधार पर कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मार्च के लास्ट से लेकर मई के लास्ट तक सूर्य गुरु राहु शनि और मंगल देश के लिए किसी भी तरह अनुकूल नहीं होंगे। ऐसे में सरकार को बेहद सावधान रहना चाहिए और सुरक्षा के मोर्चे पर भी गंभीर रूप से काम करने की जरूरत है।

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